हरदा जिले के टिमरनी की रहने वाली पलक इंदौर में किराए के मकान में रहकर बैंक में नौकरी कर रही थी। 25 जुलाई को उसका जला हुआ शव कमरे में मिला था। शुरुआती जांच में यह माना गया कि आग लगने से उसकी मौत हुई है लेकिन जब शव पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचा तो फोरेंसिक विशेषज्ञों ने शरीर पर मौजूद चोटों और जलने के निशानों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि सिर गर्दन और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि शरीर पर आग से हुए निशान मृत्यु के बाद के थे। इससे साफ हो गया कि पहले हत्या की गई और बाद में आग लगाकर इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की गई।
फोरेंसिक विशेषज्ञों के इस इनपुट के बाद पुलिस ने जांच का पूरा फोकस बदल दिया। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस दतिया निवासी मयंक शाक्य तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से पलक के संपर्क में था और उससे शादी करना चाहता था। हालांकि पलक ने शादी से इनकार कर दिया था क्योंकि उसके परिवार ने उसके लिए दूसरा रिश्ता तय कर दिया था।
आरोपी के मुताबिक वह दतिया से इंदौर पलक से मिलने पहुंचा था। दोनों पहले सराफा चौपाटी गए और वहां साथ में समय बिताया। कमरे पर लौटने के बाद जब उसने एक बार फिर शादी का प्रस्ताव रखा तो पलक ने साफ मना कर दिया। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हुआ और गुस्से में आकर आरोपी ने पहले पलक का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने शव के ऊपरी हिस्से पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी ताकि घटना को दुर्घटना साबित किया जा सके। इतना ही नहीं उसने रसोई में गैस चूल्हे के पास शव रखकर हादसे जैसा माहौल बनाने का प्रयास भी किया और अपने जले हुए कपड़े साथ लेकर वहां से फरार हो गया।
एमवाय अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ बजरंग कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान मिलने वाले छोटे से छोटे संकेत भी जांच की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी पोस्टमार्टम के समय जरूरी होनी चाहिए ताकि चिकित्सकों और जांच एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित हो सके और अपराध की तह तक जल्दी पहुंचा जा सके।
पलक हत्याकांड एक बार फिर यह साबित करता है कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीक अपराधियों को कानून से बचने नहीं देती। वैज्ञानिक जांच और पुलिस की सतर्कता के कारण इस मामले का खुलासा बेहद कम समय में हो गया और आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गया। यह घटना समाज के लिए भी एक संदेश है कि रिश्तों में अस्वीकार को स्वीकार करना सीखना जरूरी है क्योंकि जुनून और हिंसा केवल जीवन ही नहीं बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी छीन लेती है।
