रजा मुराद ने अपने संदेश की शुरुआत जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की खबरें और तस्वीरें बेहद पीड़ादायक हैं। उनके अनुसार, यदि युवा अपनी बात रखने के लिए सड़क पर उतरते हैं तो सबसे पहले उनकी बात सुनने और संवाद स्थापित करने की कोशिश की जानी चाहिए।
उन्होंने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि घर का कोई बच्चा नाराज हो जाए या अपनी शिकायत रखे तो उसे डांटने या कठोरता दिखाने के बजाय समझाया और मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र भी इसी देश के बच्चे हैं और समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में उनके साथ भी वही व्यवहार होना चाहिए, जो किसी परिवार के सदस्य के साथ किया जाता है।
रजा मुराद ने कहा कि किसी भी घायल व्यक्ति के घाव पर मरहम लगाया जाता है, नमक नहीं छिड़का जाता। उनके मुताबिक यदि छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो जरूरत उन्हें और आहत करने की नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं को समझने और भरोसा दिलाने की है। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।
अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि आज जिन युवाओं को हम प्रदर्शनकारी के रूप में देख रहे हैं, वही कल देश के विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदार भूमिकाएं निभाएंगे और देश की बागडोर संभालेंगे। इसलिए उनके साथ संवाद, संवेदनशीलता और सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से आग्रह किया कि वे हालात को टकराव के बजाय बातचीत और विश्वास के जरिए संभालने का प्रयास करें।
रजा मुराद ने अपने संदेश के अंत में कहा कि देश केवल सीमाओं से बना भूभाग नहीं, बल्कि एक बड़ा परिवार है और छात्र उसी परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने अपील की कि युवाओं को अकेला या उपेक्षित महसूस कराने के बजाय उनके साथ विश्वास का रिश्ता मजबूत किया जाए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।
इससे पहले अभिनेता रघुवीर यादव भी छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। अब रजा मुराद के बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बना हुआ है।
