सोमवार के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान शिव का ध्यान करना शुभ माना जाता है। पूजा के स्थान को साफ करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर पूजा शुरू की जा सकती है। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करने के बाद महादेव को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद दूध दही शहद और गंगाजल से अभिषेक करने की परंपरा है। भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा और आक के फूल अर्पित किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। बेलपत्र चढ़ाते समय उसके तीनों पत्ते पूरे होने चाहिए। भक्त अपनी मनोकामना के साथ भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। इसके साथ ही शिव चालीसा का पाठ और शिव आरती की जा सकती है।
सोमवार व्रत में खानपान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। कई भक्त पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाने और व्रत में खाए जाने वाले अन्य सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में लंबे समय तक बिना भोजन के रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।
मान्यता है कि सोमवार के व्रत में मन को शांत रखना बेहद जरूरी है। व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन और विचारों को संयमित रखने का भी माध्यम माना जाता है। इसलिए इस दिन किसी के प्रति गलत भावना रखने से बचना चाहिए और जरूरतमंद लोगों की सहायता करनी चाहिए। शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का दर्शन करना भी शुभ माना जाता है।
सोमवार के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ओम नमः शिवाय का जाप करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। शाम के समय भगवान शिव की आरती करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। अलग अलग परंपराओं में व्रत खोलने का समय और नियम अलग हो सकते हैं इसलिए अपने परिवार की परंपरा और धार्मिक विधि का पालन करना उचित माना जाता है।
सोमवार का व्रत श्रद्धा विश्वास और संयम से जुड़ा धार्मिक अनुष्ठान है। मान्यता के अनुसार सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से भक्त को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। महादेव की पूजा करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा को महत्व देना सबसे जरूरी माना जाता है।
