अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध करना नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना है। उनका मानना है कि जिस तरह अन्य उत्पादों में ग्राहकों को कई विकल्प दिए जाते हैं उसी तरह पेट्रोल खरीदते समय भी लोगों को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। अभियान में किसी प्रकार की सब्सिडी या मुफ्त ईंधन की मांग नहीं की गई है बल्कि केवल विकल्प और पारदर्शिता पर जोर दिया गया है।
अभियान के समर्थकों का दावा है कि कई वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद माइलेज में कमी इंजन की कार्यक्षमता पर असर और रखरखाव की लागत बढ़ने जैसी चिंताएं जताई हैं। हालांकि इन दावों को लेकर अलग अलग विशेषज्ञों की राय हो सकती है। इसी कारण अभियान से जुड़े लोग मांग कर रहे हैं कि विभिन्न ईंधन मिश्रणों के प्रभाव पर स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराए जाएं और उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि उपभोक्ता पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें।
E20 जनता पार्टी की अन्य मांगों में सभी प्रकार के ईंधनों की स्पष्ट लेबलिंग विभिन्न फ्यूल ब्लेंड के फायदे और संभावित सीमाओं की सार्वजनिक जानकारी तथा माइलेज प्रदूषण इंजन की आयु और रखरखाव लागत से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करना भी शामिल है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को केवल एक विकल्प देने के बजाय पूरी जानकारी और कई विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
इस अभियान की शैली सोशल मीडिया पर पहले चर्चा में रहे कॉकरोच जनता पार्टी अभियान से मिलती जुलती दिखाई दे रही है। मीम्स व्यंग्य और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से लोगों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अभियान के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर कई ऐसे संदेश साझा किए हैं जिनमें वाहन मालिकों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की गई है।
फिलहाल E20 जनता पार्टी कोई औपचारिक संगठन नहीं है। इसका कोई घोषित संस्थापक या पंजीकृत ढांचा सामने नहीं आया है और न ही यह बड़े स्तर पर सड़क पर आंदोलन कर रही है। यह अभी पूरी तरह डिजिटल अभियान के रूप में सोशल मीडिया पर सक्रिय है। इसके बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ रहे हैं जिससे ईंधन नीति और उपभोक्ताओं के विकल्प के अधिकार को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
ध्यान दें: यह अभियान सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा एक उपभोक्ता अधिकार अभियान होने का दावा करता है। इसमें उठाए गए दावे और चिंताएं अभियान से जुड़े लोगों के विचार हैं। इन पर अंतिम वैज्ञानिक या नीतिगत निष्कर्ष संबंधित विशेषज्ञ संस्थाओं और सरकार की आधिकारिक रिपोर्टों पर निर्भर करेंगे।
