राज्यसभा में उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 3493.80 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 34.94 लाख मीट्रिक टन सरकारी खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। यह क्षमता प्रदेश में खरीदे गए गेहूं धान और अन्य खाद्यान्नों के सुरक्षित भंडारण तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय खाद्य निगम राज्य एजेंसियों और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर देशभर में कुल 55493.76 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 5.55 करोड़ मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसमें अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 6.3 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि देश के खाद्य सुरक्षा तंत्र में मध्य प्रदेश की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।
भंडारण क्षमता के मामले में प्रदेश से आगे केवल उत्तर प्रदेश बिहार महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में गेहूं उत्पादन और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद में भी लगातार अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। अब पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध होने से खरीदे गए अनाज के सुरक्षित संरक्षण और समय पर वितरण में भी आसानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक गोदामों और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं के विस्तार से अनाज की बर्बादी कम होगी और किसानों से खरीदी गई उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी और जरूरत के समय विभिन्न राज्यों तक खाद्यान्न की आपूर्ति भी सुचारु रूप से की जा सकेगी।
मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि राज्य के कृषि और खाद्य प्रबंधन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उत्पादन के साथ साथ भंडारण क्षमता में हुई यह बढ़ोतरी प्रदेश को देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का और अधिक मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
