वैशाख पूर्णिमा पर दमोह जिले के 1008 घरों में एक साथ होंगे गायत्री यज्ञ
विश्व शांति, मानवीय सद्भाव और आत्मशुद्धि के लिए गायत्री परिवार का सामूहिक आध्यात्मिक अभियान
दमोह, 29 अप्रैल 2026। आज दिनांक 29 अप्रैल, बुधवार को मामले की जानकारी देते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के पदाधिकारियों ने बताया कि विश्व में बढ़ती अशांति, हिंसा, तनाव और मानवता पर मंडरा रहे संकटों के निवारण के लिए भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को जन-जन तक पहुंचाने हेतु इस वर्ष भी वैशाख पूर्णिमा पर “गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ, गृहे-गृहे गायत्री साधना” अभियान चलाया जा रहा है। अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज से प्राप्त निर्देशों के अनुसार देश-विदेश में गायत्री परिजन अपने-अपने घरों में सामूहिक रूप से यज्ञ, साधना और दीपयज्ञ संपन्न करेंगे।
गायत्री परिवार के अनुसार भारतीय संस्कृति के मूल ग्रंथ वेदों में विश्वशांति का स्पष्ट संदेश “वसुधैव कुटुंबकम्” के रूप में दिया गया है, जिसका आशय है कि संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार है और सभी मनुष्य आपस में भाई-बहन हैं। इसी मानवीय भाव, करुणा, दया और आत्मीयता को जागृत करने के उद्देश्य से वैशाख पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल से दोपहर 12 बजे के बीच प्रत्येक परिवार को अपने घर में गायत्री मंत्र से 24 आहुतियां तथा महामृत्युंजय मंत्र से 3 आहुतियां यज्ञ भगवान को समर्पित करने का आह्वान किया गया है।
इस संबंध में बताया गया कि यज्ञ करते समय यह संकल्प लिया जाएगा कि हे यज्ञ देव, हमारे भावों को उज्ज्वल, निर्मल और पवित्र बनाओ, हमारे मन के विकार दूर हों तथा समूचे विश्व में शांति, सद्भाव और सकारात्मक चेतना का विस्तार हो। गायत्री परिवार की मूल विचारधारा “हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा” को आत्मसात करते हुए यह अभियान व्यक्तिगत साधना को सामाजिक परिवर्तन से जोड़ने का प्रयास है।
गायत्री परिवार दमोह द्वारा इस वर्ष 1 मई को जिले भर में 1008 गायत्री परिजनों के घरों पर एक साथ गायत्री यज्ञ कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही सभी सक्रिय परिजन अपने-अपने संपर्क क्षेत्र के अन्य परिवारों में भी यज्ञ संपन्न कराएंगे, जिससे अधिकाधिक घरों तक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो सके।
जिले के विभिन्न प्रज्ञा संस्थानों जैसे गायत्री शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, चेतना केंद्र एवं चरमपीठ से जुड़े ग्रामों में भी इस आयोजन का संदेश पहुंचाया जा चुका है। परिजनों को निर्देशित किया गया है कि गायत्री परिवार द्वारा उपलब्ध कराई गई शुद्ध जड़ी-बूटियों से निर्मित हवन सामग्री का उपयोग किया जाए। यदि किसी स्थान पर यह सामग्री उपलब्ध न हो तो जौ, तिल अथवा देशी गुड़ की गोलियों को घी में मिलाकर भी यज्ञ किया जा सकता है।
आयोजन के अंतर्गत संध्या काल में प्रत्येक परिवार अपने घरों में पांच-पांच दीपक प्रज्ज्वलित कर 24 बार गायत्री मंत्र उच्चारित करते हुए दीपयज्ञ भी संपन्न करेगा। साथ ही घरों में देवस्थापना, दैनिक उपासना-साधना, सद्साहित्य स्वाध्याय, अखंड ज्योति परिवार एवं युग निर्माण योजना जैसी पत्रिकाओं की सदस्यता तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य को नियमित आध्यात्मिक अनुशासन से जोड़ने का भी संदेश दिया गया है।
गायत्री परिवार के पदाधिकारियों ने बताया कि कोविड काल वर्ष 2020 की वैशाख पूर्णिमा से यह सामूहिक गृह यज्ञ अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामाजिक वातावरण में अनुभव किए जा रहे हैं। लोगों में मानसिक शांति, पारिवारिक सामंजस्य, आध्यात्मिक चेतना तथा सामाजिक सहयोग की भावना में वृद्धि देखी गई है। इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी अधिकाधिक परिवारों को इस आध्यात्मिक अभियान से जोड़ा जा रहा है।
गायत्री परिवार ने जिले के समस्त श्रद्धालुजनों से अपील की है कि वे वैशाख पूर्णिमा पर अपने घरों को यज्ञ, साधना, दीपयज्ञ और सकारात्मक चिंतन का केंद्र बनाकर विश्वशांति के इस महाअभियान में सहभागी बनें।
