परंपरागत फसलों से हटकर औषधीय खेती की ओर बढ़ रहे किसान, कम लागत में अधिक आय की संभावना
दमोह, 28 मार्च 2026। जिले में खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। लंबे समय से गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी परंपरागत फसलों पर निर्भर रहे किसान अब औषधीय एवं वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच किसान नई संभावनाओं की तलाश में हैं। इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल दमोह जिले की ग्राम पंचायत खड़ेरी के युवा किसान आकाश शक्ति पटेल ने पेश की है, जिन्होंने कलौंजी की खेती कर कृषि नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाया है।सरकार द्वारा खेती को लाभ का धंधा बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। किसान कल्याण को प्राथमिकता देते हुए किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय एवं नकदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभागीय मार्गदर्शन और किसानों की जागरूकता के कारण जिले में खेती की तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है।
औषधीय खेती से बढ़ रही आय की उम्मीद
खेती में बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के कारण पारंपरिक फसलों में लाभ सीमित हो गया है। ऐसे में औषधीय फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन रही हैं। बटियागढ़ क्षेत्र में कलौंजी की खेती का यह प्रयास न केवल आय बढ़ाने में सहायक हो सकता है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।कलौंजी की प्रमुख मंडी नीमच मानी जाती है। वर्तमान में नीमच मंडी में कलौंजी का भाव लगभग 20 हजार से 30 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बताया जा रहा है। इस बाजार भाव को देखते हुए किसानों को इस फसल से परंपरागत फसलों की तुलना में अधिक लाभ मिलने की संभावना है। यदि उत्पादन अनुमान के अनुरूप रहा तो कम रकबे में भी अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
एक एकड़ में शुरू किया नया प्रयोग
ग्राम पंचायत खड़ेरी के किसान आकाश शक्ति पटेल ने बताया कि आयुष विभाग के जिला अधिकारी राजकुमार पटेल के मार्गदर्शन में उन्होंने एक एकड़ भूमि में कलौंजी की खेती का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि कलौंजी एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल है, जिसकी मांग बाजार में वर्षभर बनी रहती है।किसान के अनुसार, उचित तकनीक और देखभाल के साथ एक एकड़ भूमि से लगभग 4 से 5 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान बाजार भाव के अनुसार यह खेती किसानों को अच्छी आमदनी दे सकती है। उन्होंने बताया कि इस फसल में पानी की आवश्यकता भी कम होती है और लागत अपेक्षाकृत कम रहती है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
आकाश पटेल की इस पहल से क्षेत्र के अन्य किसान भी औषधीय खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाएं, तो उनकी आय में वृद्धि हो सकती है और खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।जिला प्रशासन और संबंधित विभाग भी किसानों को नई फसलों के बारे में जानकारी देकर उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं। आने वाले समय में जिले में औषधीय खेती का रकबा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। खेती में बदलाव ही बेहतर आय का रास्ता है। परंपरागत फसलों के साथ औषधीय फसलों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
