( डॉ. एल.एन. वैष्णव )
दमोह/ जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में आमजन की समस्याओं पर प्रशासन का सख्त और जवाबदेह चेहरा देखने को मिला। जिला कलेक्टर एवं दंडाधिकारी प्रताप नारायण यादव ने स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई में कुल 223 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें राजस्व, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित शिकायतें सर्वाधिक रहीं। दमोह जिले के वर्तमान कलेक्टर के रूप में प्रताप नारायण यादव पदस्थ हैं।

जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों, शहरी नागरिकों, महिलाओं एवं बुजुर्गों ने भूमि विवाद, सीमांकन, आवास योजना, शासकीय योजनाओं में अनियमितता, अतिक्रमण, राजस्व प्रकरण, पेयजल, सड़क, स्वच्छता तथा पंचायत स्तरीय भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें प्रशासन के समक्ष रखीं। कलेक्टर ने प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं बल्कि समयबद्ध, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर नगर दंडाधिकारी मीना मसराम, अपर कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रवीण फुलपगारे, डिप्टी कलेक्टर आर.एल. बागरी, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रजापति सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित प्रकरणों में आवेदकों की समस्याएं सुनीं तथा त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
भ्रष्टाचार और लापरवाही पर तत्काल गिरी गाज
जनसुनवाई के दौरान दो ऐसे मामले सामने आए जिनमें कलेक्टर ने बिना विलंब सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि जनता से छल और शासकीय कार्यों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी: पंचायत सचिव निलंबित
पटेरा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुमारी की एक वृद्ध महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर तत्कालीन पंचायत सचिव विजय खंपरिया द्वारा उससे अनुचित राशि ली गई और बाद में उसे गुमराह किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच प्रतिवेदन तलब किया और प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाए जाने पर सचिव विजय खंपरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
सीएम हेल्पलाइन में झूठी रिपोर्ट: पटवारी पर कार्रवाई
दूसरा मामला तहसील पटेरा का सामने आया, जहां सीमांकन, नक्शा सुधार एवं तरमीम कार्य लंबे समय से लंबित था। आवेदक ने आरोप लगाया कि हल्का पटवारी श्रीमती प्रिया श्रीवास्तव ने बिना समस्या का निराकरण किए ही सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत बंद कर झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी। कलेक्टर ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए संबंधित पटवारी को तत्काल निलंबित करने के आदेश दिए।
आवेदक को सुने बिना पोर्टल पर निराकरण: RI और तहसीलदार को नोटिस
दमयंती नगर तहसील से आए एक अन्य प्रकरण में यह पाया गया कि आवेदक की बात सुने बिना और वास्तविक जांच किए बिना शिकायत का ऑनलाइन निराकरण दर्ज कर दिया गया। इस पर नाराज कलेक्टर ने संबंधित राजस्व निरीक्षक (RI) तथा तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
कलेक्टर बोले—छोटे काम के लिए जनता जिला मुख्यालय न दौड़े
जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सभी एसडीएम, सीएमओ, जनपद सीईओ, तहसीलदार एवं विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे छोटे-छोटे कार्य जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर संभव है, उनके लिए नागरिकों को जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि तहसील, अनुभाग, जनपद और नगर स्तर पर नियमित कैंप आयोजित कर समस्याओं का निराकरण किया जाए। विशेष रूप से राजस्व और पंचायत विभाग से जुड़े मामलों में मैदानी अमले की जवाबदेही तय की जाए।
कलेक्टर ने कहा कि यदि कोई अधिकारी बिना मौके पर जांच किए पोर्टल पर निराकरण दर्ज करता है या आवेदक को अनावश्यक भटकाता है तो उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों से अपील—पहले स्थानीय स्तर पर दें आवेदन
कलेक्टर ने जनसुनवाई में आए नागरिकों से भी अपील की कि वे अपनी समस्याएं पहले तहसील, जनपद, नगर पालिका अथवा संबंधित अनुभागीय कार्यालय में प्रस्तुत करें। यदि वहां सुनवाई न हो या न्याय न मिले, तभी जिला मुख्यालय पहुंचें।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन हर वास्तविक शिकायत पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करेगा और किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
जनसुनवाई बनी जवाबदेही का मंच
मंगलवार की यह जनसुनवाई केवल आवेदन लेने की औपचारिकता नहीं रही, बल्कि लापरवाह और भ्रष्ट मैदानी कर्मचारियों पर प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में सामने आई। सचिव और पटवारी के निलंबन तथा RI-तहसीलदार को नोटिस ने साफ कर दिया है कि जिला प्रशासन अब शिकायतों के कागजी निस्तारण से आगे बढ़कर जवाबदेही तय करने के मूड में है।जनता के बीच भी यह संदेश गया कि यदि शिकायत तथ्यपूर्ण है तो उस पर कार्रवाई संभव है—बस आवाज सही मंच तक पहुंचनी चाहिए।
