दमोह, 18 जून 2026। जिले में शासकीय सेवाओं की गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में गुरुवार सुबह लगभग 9 बजे प्रताप नारायण यादव ने बिना पूर्व सूचना के लक्ष्मणकुटी, महंतपुर और सद्गुवां क्षेत्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक शिक्षक के निलंबन, स्वास्थ्य विभाग के नौ अधिकारियों-कर्मचारियों का तीन-तीन दिन का वेतन काटने तथा संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर के अचानक निरीक्षण से संबंधित विभागों में हड़कंप की स्थिति बनी रही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कार्य में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
सद्गुवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मिली बड़ी लापरवाही
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सुबह करीब 10:35 बजे सद्गुवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ चिकित्सक सहित कुल नौ अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी समय में अनुपस्थित पाए गए।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की सामूहिक अनुपस्थिति को गंभीर लापरवाही मानते हुए कलेक्टर ने सभी अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों का तीन-तीन दिवस का वेतन काटने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सेवाओं की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता शासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
हाई स्कूल लक्ष्मणकुटी में छात्रों को नहीं थी टाइम-टेबल की जानकारी

इसके बाद कलेक्टर पीएम श्री शासकीय एकीकृत हाई स्कूल लक्ष्मणकुटी पहुंचे, जहां उन्होंने कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। बातचीत के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अधिकांश विद्यार्थियों को विद्यालय के टाइम-टेबल की जानकारी नहीं थी।
विद्यालय में कुल 14 शिक्षक पदस्थ होने के बावजूद छात्राओं की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम पाई गई। कलेक्टर ने विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया कि कक्षावार टाइम-टेबल प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए तथा विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, नियमित मूल्यांकन करने और अभिभावकों से सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
प्राथमिक शाला लक्ष्मणकुटी में पढ़ाई से ज्यादा टेबल वर्क पर जोर
कलेक्टर ने प्राथमिक शाला लक्ष्मणकुटी का भी निरीक्षण किया। यहां दो शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन निरीक्षण के समय केवल चार विद्यार्थी उपस्थित मिले। दोनों शिक्षिकाएं शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय कार्यालयीन कार्यों में व्यस्त थीं।
कलेक्टर ने बच्चों की नोटबुक और गृहकार्य की जांच की। जांच में पाया गया कि विद्यार्थियों को दिया गया दो दिन पुराना गृहकार्य अब तक जांचा नहीं गया था। इसके अलावा बच्चों की शैक्षणिक प्रगति का नियमित मूल्यांकन भी नहीं किया जा रहा था।
इस पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक शिक्षक प्रतिदिन विद्यार्थियों की कॉपियां जांचें, नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करें और बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार लाने के लिए प्रभावी प्रयास करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों में शिक्षण कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए और किसी भी स्थिति में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
महंतपुर प्राथमिक शाला में शिक्षक अनुपस्थित, निलंबन के निर्देश
कलेक्टर ने महंतपुर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का भी निरीक्षण किया। यहां दो शिक्षकों का पदस्थापन है। निरीक्षण के दौरान प्रधानाध्यापक संजीव ठाकुर उपस्थित मिले, जबकि शिक्षक प्रदीप बिल्थरे बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए।
अनुपस्थिति को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कलेक्टर ने संबंधित शिक्षक के निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी लापरवाही से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है।
आंगनबाड़ी केंद्र में नहीं मिला एक भी बच्चा
महंतपुर आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान भी व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलीं। केंद्र में सहायिका मालती अहिरवार उपस्थित थीं, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कविता राज अनुपस्थित मिलीं। निरीक्षण के समय केंद्र पर एक भी बच्चा मौजूद नहीं था।
कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की नियमित उपस्थिति, पोषण आहार वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण और प्रारंभिक शिक्षा संबंधी गतिविधियों की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए।
जवाबदेही तय करने पर जोर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट संदेश दिया कि जिले में प्रशासनिक जवाबदेही और कार्य संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ करें।
उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से मैदानी भ्रमण करें, अधीनस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की निगरानी करें तथा नागरिकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं में सुधार लाना और आमजन का विश्वास मजबूत करना है। इसी दिशा में जिला प्रशासन द्वारा निरंतर निगरानी और समीक्षा की जा रही है।
