(डॉ एल एन वैष्णव)️
दमोह। जिले में डेंगू और मलेरिया के लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि संक्रमण का खतरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन रोकथाम की व्यवस्था उसी गति से मजबूत नहीं हो सकी। शहर के कई वार्डों में जलभराव, गंदगी और मच्छरों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में डेंगू के 71 मामले सामने आए थे, जो 2023 में बढ़कर 216 हो गए। वर्ष 2024 में 230 केस दर्ज किए गए, जबकि 2025-26 में भी डेंगू का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी बताती है कि रोकथाम की रणनीति को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।इसी बीच जिले में डेंगू और मलेरिया से संदिग्ध तौर पर कुछ मरीजों की मौत के मामलों की भी चर्चा सामने आई है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि सभी मामलों में स्पष्ट नहीं हो पाई, लेकिन इन घटनाओं ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। नागरिकों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर जांच और उपचार तेज होता तो स्थिति गंभीर होने से रोकी जा सकती थी।
शहर में बढ़ रहा मच्छरों का प्रकोप

नगर के कई क्षेत्रों में नालियों की सफाई अधूरी रहने और खाली प्लॉटों में पानी जमा होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार कुछ इलाकों में फॉगिंग अभियान नियमित नहीं होने से समस्या और गंभीर हो रही है। वहीं कचरे के ढेर और खुले नालों से भी स्थिति बिगड़ रही है।
लोगों का कहना है कि
- कई वार्डों में दवा छिड़काव सीमित रहा
- अंदरूनी गलियों तक फॉगिंग नहीं पहुंची
- जलभराव वाले स्थान लंबे समय तक बने रहे
- शिकायतों के बाद कार्रवाई में समय लगा
लार्वा सर्वे और जागरूकता पर जोर जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू और मलेरिया की रोकथाम में लार्वा सर्वे और घर-घर जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि समय रहते पानी जमा होने वाले स्थानों की पहचान कर उन्हें समाप्त किया जाए तो संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार
- नियमित लार्वा सर्वे जरूरी
- हाई रिस्क क्षेत्रों की पहचान आवश्यक
- जागरूकता अभियान बढ़ाना होगा
- संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच जरूरी
शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक असर

डेंगू-मलेरिया का खतरा अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है। तालाब किनारे बस्तियों, नई कॉलोनियों और निर्माणाधीन क्षेत्रों में पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ने की शिकायतें मिल रही हैं। घनी आबादी वाले वार्ड, बस स्टैंड के आसपास और जलभराव वाले इलाकों में अधिक सतर्कता की आवश्यकता बताई जा रही है।
डॉक्टरों ने दी सावधानी की सलाह
चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू और मलेरिया दोनों ही समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर हो सकते हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स गिरने का खतरा रहता है, जबकि मलेरिया में तेज बुखार और कमजोरी की समस्या होती है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
क्या जरूरी कदम
- नियमित फॉगिंग अभियान
- जलभराव समाप्त करना
- नालियों की समय पर सफाई
- घर-घर जागरूकता अभियान
- संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच
बढ़ती चिंता, समय रहते तैयारी जरूरी
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में डेंगू-मलेरिया के मामलों में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में स्वच्छता, लार्वा नियंत्रण और जनजागरूकता को प्राथमिकता देना जरूरी माना जा रहा है। वहीं संदिग्ध मौतों की चर्चाओं ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है, जिससे नागरिक जिम्मेदार विभागों से ठोस और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
