अखिल भारतीय ज्योतिष वास्तु परिषद और अंतरराष्ट्रीय श्रीराम सेना के संयुक्त आयोजन में देशभर के विद्वानों ने दी श्रद्धांजलि

ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म, धर्म और समाजसेवा से जुड़ी विभूतियों का सम्मान, सनातन ज्ञान परंपरा के संरक्षण का लिया संकल्प
इंदौर, 29 अप्रैल 2026। आज दिनांक 29 अप्रैल, बुधवार को इंदौर के महेश नगर स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में स्वर्गीय पाटन वाले गुरुजी के पुण्य स्मरण में एक विशाल, भव्य एवं गरिमामय विद्वत समारोह का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय ज्योतिष वास्तु परिषद एवं अंतरराष्ट्रीय श्रीराम सेना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस निशुल्क विद्वत समारोह ने राष्ट्रीय विद्वत संगम का रूप ले लिया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से ज्योतिषाचार्य, वास्तुविद, संत-महात्मा, आध्यात्मिक मार्गदर्शक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
समारोह का शुभारंभ स्वर्गीय पाटन वाले गुरुजी के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु वंदना के बीच उपस्थित अतिथियों ने गुरुजी के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया। पूरे सभागार में श्रद्धा, आध्यात्मिकता और भारतीय सांस्कृतिक चेतना का वातावरण निर्मित हो गया।

गुरुजी के जीवन को बताया समाज के लिए प्रेरणास्रोत
आयोजन समिति की ओर से अखिल भारतीय ज्योतिष वास्तु परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित पंकज शर्मा एवं कार्यक्रम अध्यक्ष पंडित संजय शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय पाटन वाले गुरुजी ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीय ज्योतिष, सनातन धर्म, अध्यात्म, मानव सेवा और जनमार्गदर्शन को समर्पित किया। वे केवल भविष्य बताने वाले विद्वान नहीं थे, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाले गुरु पुरुष थे। उन्होंने हजारों परिवारों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।
उन्होंने कहा कि गुरुजी की पुण्यतिथि पर यह आयोजन श्रद्धांजलि के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का भी संकल्प है। इसी उद्देश्य से देशभर के विद्वानों को एक मंच पर आमंत्रित कर ज्ञान, संस्कार और परंपरा के इस महायज्ञ को स्वरूप दिया गया।
देश के कई राज्यों से पहुंचे विद्वान, बना राष्ट्रीय सम्मेलन जैसा माहौल
आयोजकों ने बताया कि इस विशेष समारोह में मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश सहित देश के अनेक हिस्सों से ज्योतिष, वास्तु एवं आध्यात्मिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। विभिन्न विषयों के विद्वानों की उपस्थिति से कार्यक्रम राष्ट्रीय सम्मेलन जैसा दिखाई दिया।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिकता की अंधी दौड़ के बीच भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान, ज्योतिषीय विज्ञान, वास्तुशास्त्र और सनातन जीवन मूल्यों को संरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। स्वर्गीय पाटन वाले गुरुजी का जीवन इसी मिशन का प्रतीक था।
विभिन्न विधाओं के विद्वानों और समाजसेवियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान ज्योतिष, वास्तु, धार्मिक जागरण, समाजसेवा एवं सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों का सम्मान भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं बल्कि उन मूल्यों का है जो समाज को दिशा देते हैं।
उक्त आयोजन में पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर श्यामानंद महाराज, ज्योतिष आचार्य पं. नारायण वैष्णव, ज्योतिषाचार्य गौरव अग्रवाल, वास्तुविद गौरव गुप्ता, ज्योतिषाचार्य शिव मेहता, गोंदी वाले हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी जितेंद्र नाथ, श्रीराम पांचाल, जयदीप दुबे, एम.के. जैन, समाजसेवी जीतू गुप्ता बाबा, हेमंत श्रीवास्तव, ज्योतिष आचार्य श्रीमती नीतू मित्तल, ज्योतिष आचार्य मीना राव, अनंत योगेंद्र महंत सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
सनातन, ज्योतिष और वास्तु पर हुआ वैचारिक मंथन
समारोह में उपस्थित विद्वानों ने अपने उद्बोधन में ज्योतिष विज्ञान की उपयोगिता, वास्तुशास्त्र की सामाजिक प्रासंगिकता, धर्म और अध्यात्म की वर्तमान समय में आवश्यकता तथा सनातन परंपरा के संरक्षण पर विस्तार से विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन प्रबंधन, मानसिक संतुलन, सामाजिक सामंजस्य और मानव कल्याण का विज्ञान है।
कई विद्वानों ने इस अवसर पर स्वर्गीय पाटन वाले गुरुजी के साथ बिताए अपने अनुभव भी साझा किए और बताया कि गुरुजी की वाणी, सरलता और जनसंपर्क ने उन्हें लाखों लोगों का श्रद्धाकेंद्र बनाया था।
श्रद्धा, सम्मान और संकल्प का बना संगम
पूरे आयोजन के दौरान गुरु स्मरण, विद्वत सम्मान और वैचारिक चर्चा का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे केवल एक स्मृति समारोह नहीं बल्कि सनातन चेतना के महोत्सव के रूप में अनुभव किया। आयोजकों ने अंत में घोषणा की कि भविष्य में भी इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के विद्वत आयोजन निरंतर किए जाएंगे ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम का संचालन पंडित गिरीश व्यास ने किया तथा अंत में सभी अतिथियों, विद्वानों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
