गुमशुदगी की झूठी कहानी से हत्या छिपाने की कोशिश नाकाम, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल ने खोला राज, न्यायालय ने सुनाया सख्त फैसला
इंदौर | विशेष संवाददाता
प्रेम संबंधों के चलते पति की हत्या कर गुमशुदगी का झूठा नाटक रचने वाले एक सनसनीखेज मामले में न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी, उसके प्रेमी और प्रेमी के साथी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला इस बात का स्पष्ट संदेश है कि योजनाबद्ध हत्या और अपराध को छिपाने की हर कोशिश कानून के सामने टिक नहीं सकती।
30 जुलाई 2026 को माननीय नवम् अपर सत्र न्यायाधीश श्री विवेक कुमार चंदेल की अदालत ने थाना चंदन नगर, इंदौर के बहुचर्चित हत्या प्रकरण में आरोपी सद्दाम हुसैन, शाकिर खान और मृतक की पत्नी रूखसाना को दोषी करार देते हुए कठोर दंड सुनाया।
न्यायालय ने आरोपी सद्दाम हुसैन और शाकिर खान को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने के अपराध में आजीवन कारावास, धारा 201 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास तथा प्रत्येक पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं पत्नी रूखसाना को हत्या और षड्यंत्र के अपराध में आजीवन कारावास एवं 12 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
ऐसे शुरू हुई पूरी कहानी
अभियोजन के अनुसार 22 अप्रैल 2023 को रूखसाना ने थाना चंदन नगर पहुंचकर अपने पति जावेद मंसूरी की गुमशुदगी दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि उसका पति एक दिन पहले काम की तलाश में घर से निकला था और रात में फोन पर बात होने के बाद सब्जी लेकर घर आने की बात कही थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटा।
रूखसाना ने दावा किया कि उसने रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के क्षेत्रों में काफी तलाश की, लेकिन पति का कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने उसकी शिकायत पर गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
परिजनों के शक ने बदल दी जांच की दिशा
गुमशुदगी की जांच के दौरान मृतक के परिजनों ने पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रूखसाना के सद्दाम हुसैन के साथ प्रेम संबंध थे और इसी वजह से जावेद के साथ विवाद होता रहता था। परिजनों ने आशंका जताई कि जावेद की गुमशुदगी के पीछे यही संबंध कारण हो सकते हैं।
पुलिस ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए जांच का दायरा बढ़ाया।
मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन से खुला हत्या का राज
जांच अधिकारियों ने रूखसाना, सद्दाम, शाकिर और जावेद के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तथा लोकेशन का विश्लेषण कराया। तकनीकी साक्ष्यों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिससे तीनों संदेह के घेरे में आ गए।
इसके बाद पुलिस ने सद्दाम हुसैन को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने पूरे षड्यंत्र का खुलासा कर दिया।
प्रेम संबंधों के चलते रची गई हत्या की साजिश
पूछताछ में सद्दाम ने बताया कि उसका रूखसाना से प्रेम संबंध था। जावेद को इस संबंध की जानकारी होने के कारण वह अपनी पत्नी से मारपीट करता था। इसी वजह से रूखसाना, सद्दाम और शाकिर ने मिलकर जावेद को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
योजना के अनुसार 21 अप्रैल 2023 की रात जावेद की हत्या कर दी गई और उसके शव को ग्रीन पार्क कॉलोनी के एक खाली मैदान में छिपा दिया गया, ताकि किसी को हत्या का पता न चल सके।
वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन
पुलिस ने आरोपियों के खुलासे के आधार पर साक्ष्य जुटाए। घटनास्थल का निरीक्षण, गवाहों के बयान, मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया गया।
संपूर्ण जांच के बाद थाना चंदन नगर में हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने माना अपराध पूरी तरह सिद्ध
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी दस्तावेजी, तकनीकी और मौखिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। साक्ष्यों के विस्तृत परीक्षण के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि तीनों आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया।
इसी आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित विभिन्न धाराओं में कठोर दंड सुनाया।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी
प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्री सुरेन्द्र सिंह वास्केल ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपों को न्यायालय में सिद्ध करने में सफल रहा।
समाज के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला केवल तीन आरोपियों को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि व्यक्तिगत संबंधों या किसी भी विवाद का समाधान हिंसा नहीं हो सकता। योजनाबद्ध हत्या, झूठी गुमशुदगी और साक्ष्य छिपाने जैसी कोशिशें आधुनिक तकनीकी जांच और कानून की पकड़ से बच नहीं सकतीं। न्यायालय का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि गंभीर अपराध करने वालों को अंततः कठोर दंड का सामना करना ही पड़ता है।
