इंदौर, 17 मार्च 2026/जिला बदर आदेश का उल्लंघन करने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को कठोर दंड सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती बिंदिया पाठक, जिला इंदौर ने प्रकरण क्रमांक 9650/2025 में निर्णय पारित करते हुए आरोपी कपिल यादव (23 वर्ष) को धारा 14 मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
प्रभावी पैरवी से मिला न्याय
प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया के अनुसार, प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती ज्योति तोमर ने सशक्त पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
मुखबिर की सूचना से पकड़ा गया आरोपी
अभियोजन के अनुसार, 12 अक्टूबर 2025 को परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि जिला बदर किया गया आरोपी कपिल यादव कुलकर्णी के भट्टे स्थित एक परिसर में अपने साथियों के साथ मौजूद है।सूचना पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और बताए गए हुलिए के आधार पर आरोपी को पकड़ लिया।
जिला बदर के बावजूद शहर में मौजूद मिला
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम कपिल यादव पिता सुनील यादव बताया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उसके विरुद्ध 24 मई 2025 को पुलिस आयुक्त, नगरीय इंदौर द्वारा जिला बदर आदेश जारी किया गया था, जिसके बावजूद वह जिले की सीमा में पाया गया।
गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में पेश किया गया चालान
पुलिस ने आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर परदेशीपुरा थाना लाकर उसके विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया। विवेचना पूर्ण होने के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
साक्ष्यों के आधार पर सुनाई गई सजा
प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया और उसे 3 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड से दंडित किया।
यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि जिला बदर जैसे आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करता है।
