(डॉ एल एन वैष्णव)
दमोह, 18 मार्च 2026/डॉ. विजय लाल स्मृति महाविद्यालय, दमोह में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित रजत जयंती समारोह गरिमा, भव्यता और प्रेरणादायी वातावरण के बीच संपन्न हुआ। समारोह में शिक्षा, संस्कार और संघर्ष की त्रिवेणी देखने को मिली, जहां मंच से दिए गए उद्बोधनों ने विद्यार्थियों को नई दिशा प्रदान की।कार्यक्रम केमुख्य अतिथि रानी अवंती बाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर के कुलगुरु डॉ. विनोद मिश्रा रहे, जबकि अध्यक्षता कुलसचिव डॉ. श्रीमती शक्ति जैन ने की। विशेष अतिथि के रूप में डॉ. आलोक जैन, पंचम सनोडिया, राकेश चडार सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

‘विजय यात्रा’ रजत जयंती विशेषांक का विमोचन
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रहा “विजय यात्रा” नामक रजत जयंती विशेषांक का विमोचन। मुख्य अतिथि डॉ. विनोद मिश्रा के साथ मंचासीन अतिथियों ने संयुक्त रूप से इस विशेषांक का लोकार्पण किया। इस विशेषांक में महाविद्यालय की 25 वर्षों की उपलब्धियों, संघर्षों और विकास यात्रा को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

“संघर्ष से ही बनती है सफलता की राह” – डॉ. विनोद मिश्रा
अपने ओजस्वी उद्बोधन में डॉ. विनोद मिश्रा ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि यह निरंतर संघर्ष, अनुशासन और समय की पाबंदी से ही प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाने और समय का सम्मान करने की सीख दी।उन्होंने महाविद्यालय की 25 वर्षों की यात्रा को संघर्ष और समर्पण का परिणाम बताते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि संस्थान स्वर्ण जयंती तक नई ऊंचाइयों को छुएगा।
आध्यात्म और जीवन मूल्य पर विशेष जोर
डॉ. मिश्रा ने महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसंगों के माध्यम से जीवन में धैर्य, कर्म और समर्पण का महत्व समझाया। उन्होंने सेवा भाव को जीवन का मूल बताते हुए कहा कि “सेवा ही सबसे बड़ी साधना है।”उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत मां नर्मदा अष्टक से की और मंच पर जूते उतारकर भाषण देकर भारतीय परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
“रील नहीं, रियलिटी पर ध्यान दें” – डॉ. शक्ति जैन
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शक्ति जैन ने विद्यार्थियों को समय, अनुशासन और धैर्य का महत्व बताते हुए सोशल मीडिया के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को “रील” की बजाय “रियलिटी” पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
अन्य अतिथियों के विचार
डॉ. आलोक जैन ने संसाधनों के सदुपयोग पर बल दिया, वहीं पंचम सनोडिया ने समय प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता को सफलता का आधार बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को सही समय पर सही निर्णय लेने की प्रेरणा दी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतिभाओं का सम्मान
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। साथ ही महाविद्यालय की उदीयमान प्रतिभाओं का सम्मान भी किया गया, जिससे विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार हुआ।
आभार प्रदर्शन
अंत में डॉ. शीला लाल ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।समारोह की विशेषता यह रही कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना, जहां संघर्ष, अनुशासन, सेवा और संस्कार के संदेशों ने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
