दमोह,01 April/ शहर की सड़कों पर इन दिनों बिना नंबर और तेज रफ्तार से दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मौत का सामान बनकर घूम रही हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यातायात पुलिस और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर खतरे पर आंखें मूंदे बैठे हैं। व्यस्त बाजारों, स्कूलों के आसपास और मुख्य मार्गों पर दिन-दहाड़े बिना पंजीयन, बिना सुरक्षा मानकों और बिना किसी नियंत्रण के ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती नजर आती हैं, मानो नियम-कानून इनके लिए बने ही न हों।
जानकारी के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में ऐसी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चल रही हैं जिन पर न तो नंबर प्लेट है, न रजिस्ट्रेशन का कोई संकेत। कई वाहन कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत हैं, लेकिन खुलेआम रेत, गिट्टी, मुरम और निर्माण सामग्री का व्यवसायिक परिवहन कर रहे हैं। यह सीधा नियमों का उल्लंघन है, फिर भी कार्रवाई का अभाव सवाल खड़े करता है कि क्या इन वाहनों को किसी का संरक्षण प्राप्त है या फिर जिम्मेदार विभाग जानबूझकर अनदेखी कर रहा है।
सबसे खतरनाक स्थिति तब बनती है जब इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में न तो इंडिकेटर होते हैं, न ब्रेक लाइट, और न ही पीछे रेडियम या रिफ्लेक्टर। रात के समय यह चलती फिरती ‘अंधेरी दीवार’ बन जाती हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहन चालक अचानक हादसे का शिकार हो सकते हैं। शहर में पहले भी इस तरह की लापरवाही से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर हादसे के बाद कुछ दिन की औपचारिकता के अलावा कोई स्थायी कार्रवाई दिखाई नहीं देती।
नियमों के अनुसार बिना नंबर प्लेट वाहन चलाना, कृषि पंजीयन वाले वाहन से व्यावसायिक परिवहन करना, ओवरलोडिंग करना और सुरक्षा उपकरणों के बिना वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद शहर में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सवाल यह है कि जब आम दोपहिया वाहन चालकों पर हेलमेट और दस्तावेजों को लेकर सख्ती दिखाई जाती है, तो बिना नंबर और बिना सुरक्षा मानकों वाले भारी वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तेज गति से भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से गुजरती हैं, जिससे पैदल राहगीरों, स्कूली बच्चों और दोपहिया चालकों की जान जोखिम में पड़ती है। कई ट्रॉलियों में सामान इतना भरा रहता है कि वह सड़क पर गिरने की स्थिति में भी होता है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यातायात पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां है? क्या बिना नंबर के भारी वाहन सड़कों पर दौड़ते हुए दिखाई नहीं देते? यदि दिखते हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? और यदि कार्रवाई नहीं होती, तो क्या यह लापरवाही नहीं बल्कि जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है?
सख्त संदेश:
यदि समय रहते बिना नंबर और अवैध रूप से चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो कोई बड़ा हादसा होने में देर नहीं लगेगी। हादसे के बाद कार्रवाई करना आसान है, लेकिन जिम्मेदार प्रशासन का दायित्व हादसे को रोकना है। शहर की सड़कों पर चल रही यह अव्यवस्था सीधे-सीधे यातायात विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। अब जरूरत दिखावे की नहीं, बल्कि ठोस और सख्त कार्रवाई की है, ताकि नियमों से ऊपर खुद को समझने वालों को स्पष्ट संदेश मिल सके।
