मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जेम्स गेट्स नाम के व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी चेरिल ने उनकी हत्या की योजना बनाने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया। जेम्स को कथित साजिश का पता तब चला जब उन्हें पत्नी का हाथ से लिखा हुआ एक नोट मिला। इस नोट में कुछ पदार्थों के नाम और उनकी मात्रा का जिक्र था। साथ ही इसमें उन्हें जानलेवा बताए जाने की बात भी सामने आई। जेम्स के अनुसार नोट में बातचीत मिटाने और ChatGPT से लॉगआउट करने जैसे निर्देश भी लिखे हुए थे। इन्हीं बातों के आधार पर उन्होंने पत्नी की कथित योजना को लेकर गंभीर आशंका जताई।
मामले में दायर मुकदमे के मुताबिक जेम्स और चेरिल के वैवाहिक संबंधों में तनाव चल रहा था। इसी दौरान चेरिल कथित तौर पर ChatGPT का लगातार इस्तेमाल कर रही थीं। पति का आरोप है कि AI चैटबॉट का इस्तेमाल हत्या की योजना तैयार करने के लिए किया गया। हालांकि इन आरोपों का अंतिम सच अदालत में सामने आने वाली जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। अभी ये आरोप हैं और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
इस मामले ने एक बार फिर AI कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज कर दी है। सवाल उठ रहा है कि अगर कोई व्यक्ति किसी खतरनाक या गैरकानूनी काम के लिए AI से जानकारी लेने की कोशिश करता है तो AI सिस्टम को उसे किस स्तर तक रोकना चाहिए और कंपनियों की जिम्मेदारी कहां तक तय होनी चाहिए। ChatGPT जैसे सिस्टम को सामान्य तौर पर खतरनाक गतिविधियों से जुड़ी सहायता देने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था के साथ विकसित किया जाता है लेकिन ऐसे मामलों में इन सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
अमेरिका में OpenAI के खिलाफ पहले भी कई मुकदमे सामने आ चुके हैं। अक्टूबर में कई राज्यों की ओर से कंपनी के खिलाफ मामले दर्ज किए जाने की खबरें आई थीं। इनमें आरोप लगाया गया था कि AI चैटबॉट बच्चों और कमजोर परिस्थितियों में रहने वाले लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं तथा गलत या खतरनाक सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में यह भी आरोप लगाए गए कि चैटबॉट लोगों के भ्रम और मानसिक संकट को बढ़ा सकते हैं तथा आत्महत्या या दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों से जुड़े जोखिम पैदा कर सकते हैं।
नॉर्थ कैरोलिना का यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर AI के इस्तेमाल को कथित हत्या की योजना से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मुकदमे में लगाए गए आरोप अभी कानूनी रूप से साबित नहीं हुए हैं। आगे की जांच और अदालत की कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित योजना में ChatGPT की वास्तविक भूमिका क्या थी और आरोपों में कितनी सच्चाई है।
