शरद केलकर ने वैरायटी इंडिया के साथ बातचीत में रामायण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि हिंदी वर्जन में यश के किरदार रावण को आवाज देने के लिए नितेश तिवारी और उनकी टीम ने उनसे संपर्क किया था। शरद पहले से ही नितेश तिवारी के साथ काम करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि पिछले साल उनकी मुलाकात निर्देशक नितेश तिवारी से रवि दुबे के घर पर हुई थी। उस समय नितेश फिल्म की तैयारियों में व्यस्त थे और यहीं से इस बड़े प्रोजेक्ट के साथ शरद के जुड़ने की शुरुआत हुई।
शरद केलकर के मुताबिक यश हिंदी भाषा अच्छी तरह बोलते हैं लेकिन उनकी मुख्य भाषा कन्नड़ है। ऐसे में हिंदी संवाद बोलते समय उनके उच्चारण और शब्दों की लय में हल्का कन्नड़ एक्सेंट सुनाई देता था। इसी वजह से फिल्म के हिंदी वर्जन के लिए अलग आवाज की जरूरत महसूस हुई। शरद ने बताया कि कन्नड़ वर्जन में यश ने खुद अपनी आवाज दी है और वहां उन्होंने शानदार काम किया है। वहीं हिंदी दर्शकों तक रावण के किरदार को ज्यादा प्रभावशाली तरीके से पहुंचाने की जिम्मेदारी शरद केलकर ने संभाली।
डबिंग के दौरान शरद और यश ने मिलकर काम किया। शरद ने यश की तारीफ करते हुए बताया कि वह काफी मिलनसार हैं और डबिंग के दौरान लगातार सुझाव देते रहते थे। दोनों कलाकारों का उद्देश्य एक ही था कि हिंदी दर्शकों को रावण का किरदार दमदार और प्रभावशाली महसूस हो। शरद ने यह भी माना कि रामायण की डबिंग उनके करियर के सबसे थकाने वाले अनुभवों में से एक रही।
शरद के मुताबिक रावण सिर्फ एक शक्तिशाली योद्धा नहीं था बल्कि बेहद बुद्धिमान और पढ़ा लिखा व्यक्ति भी था। इसलिए उसकी आवाज में कमजोरी या भ्रम की झलक नहीं आनी चाहिए थी। डबिंग करते समय उन्होंने इसी बात का खास ध्यान रखा। उन्हें फिल्म के तीन सीन सबसे ज्यादा पसंद आए। इनमें रावण का दस सिर वाला सीन विद्युतजिह्वा वाला सीन और शुरुआत में ब्रह्मा जी से वरदान मांगने वाला हिस्सा शामिल है।
इनमें दस सिर वाला सीन शरद को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इस सीन में रावण अपने दस सिरों के जरिए युद्ध में जाने या इंतजार करने को लेकर सलाह करता दिखाई देता है। शरद ने इस दृश्य को बेहद शानदार बताया और इसके लिए नितेश तिवारी तथा यश की जमकर तारीफ की। उनके मुताबिक रावण के व्यक्तित्व की जटिलता को पर्दे पर दिखाना आसान नहीं था लेकिन यश ने इसे बेहद प्रभावी तरीके से निभाया और उनकी आवाज के जरिए इस किरदार को हिंदी दर्शकों तक पहुंचाने का अनुभव उनके लिए भी खास रहा।
