पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद डिवीजन के साथ 12 शरणार्थी सीटों पर मतदान निर्धारित है। अंतिम चरण में पुंछ डिवीजन की सीटों पर चुनाव होंगे। प्रशासन ने सभी चरणों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के साथ चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की है।
क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए अपने समर्थकों से मतदान में हिस्सा नहीं लेने की अपील की है। संगठन का आरोप है कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था स्थानीय जनता के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कराए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखना आवश्यक है।
चुनाव से पहले कई स्थानों पर प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में यातायात बाधित रहा, जबकि कुछ स्थानों पर संचार सेवाओं और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर देखने को मिला। सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ने की जानकारी सामने आई है।
इस चुनाव का सबसे बड़ा विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर है। ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे थे। सरकार इन सीटों को ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा मानती है। वहीं, JAAC का दावा है कि इस व्यवस्था से स्थानीय मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका सीमित होती है और चुनावी संतुलन प्रभावित होता है। संगठन का यह भी आरोप है कि इन सीटों का राजनीतिक लाभ अक्सर पाकिस्तान की प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को मिलता है।
चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने क्षेत्र में जनसभाएं कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र को अपना दूसरा घर बताते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह विकास कार्यों की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाना चाहेंगे। दूसरी ओर, PPP नेतृत्व ने भी विकास, प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय मुद्दों को चुनावी अभियान का प्रमुख विषय बनाया।
दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी मानी जाने वाली PML-N और PPP इस चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। अब सभी की नजर पहले चरण के मतदान, आगामी चरणों की प्रक्रिया और चुनाव परिणामों पर बनी हुई है, जिनसे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद है।
