ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से लोड सेटिंग के नाम पर रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली की आपूर्ति बाधित की जा रही है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय होने वाली कटौती से हो रही है। लगातार बिजली गुल रहने के कारण लोग भीषण गर्मी और उमस में रातभर जागने को मजबूर हैं। घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अंधेरे के कारण हाल ही में एक महिला छत से गिरकर घायल भी हो गई थी जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।
चक्काजाम की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद विभाग के अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
सरपंच अतर सिंह लोधी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में एक घंटे बिजली देने के बाद अगले घंटे फिर कटौती कर दी जाती है जिससे सिरसौद सहित आसपास के करीब 15 गांवों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी गई लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि करैरा कस्बे में लोड सेटिंग के नाम पर बिजली कटौती नहीं की जाती जबकि ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली बंद रखी जाती है जिससे लोगों में भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और लोड सेटिंग के नाम पर घंटों कटौती जारी रही तो वे दोबारा सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है बल्कि कुछ महीने पहले भी इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया जा चुका है लेकिन हालात अब तक नहीं बदले। ऐसे में अब वे स्थायी समाधान मिलने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
