फाइनल मुकाबले में ईशा सिंह ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और सटीक निशानेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने लगातार बढ़त बनाए रखी और 50 शॉट्स में 40 अंक हासिल करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। मेजबान चीन की मजबूत चुनौती के बावजूद ईशा ने किसी तरह का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और शानदार संयम के साथ मुकाबला अपने नाम किया।
स्वर्ण पदक की दौड़ में चीन की युयुए झांग ईशा की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी थीं। हालांकि भारतीय निशानेबाज ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्हें तीन अंकों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। झांग ने 37 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। चीन की धरती पर मेजबान देश की स्टार निशानेबाज को हराकर स्वर्ण जीतना ईशा सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
दूसरी ओर ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने भी एक बार फिर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कांस्य पदक के मुकाबले में उनका सामना उत्तर कोरिया की ह्योन ग्योंग पाक से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। मुकाबला इतना करीबी रहा कि विजेता का फैसला डबल शूटऑफ से हुआ। दबाव के इस क्षण में मनु भाकर ने शानदार संयम दिखाया और निर्णायक निशाना लगाकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।
ईशा सिंह के स्वर्ण और मनु भाकर के कांस्य पदक के साथ भारत की पदक संख्या तीन हो गई है। इससे पहले भारतीय निशानेबाज संयम ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय शूटिंग दल का आत्मविश्वास और मजबूत कर दिया है।
आईएसएसएफ वर्ल्ड कप की पदक तालिका में मेजबान चीन फिलहाल पहले स्थान पर बना हुआ है। चीन अब तक 14 पदक जीत चुका है जिनमें छह स्वर्ण पदक शामिल हैं। वहीं भारत तीन पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है। भारतीय निशानेबाजों का मौजूदा प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में भी देश के खाते में और पदक जुड़ सकते हैं तथा भारतीय दल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाए रखेगा
