उज्जैन/महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए वीआईपी सुविधा लेने और सर्किट हाउस में कमरे बुक कराने के लिए खुद को केंद्र सरकार का संयुक्त सचिव बताने वाले एक व्यक्ति का भंडाफोड़ हो गया। आरोपी को सत्कार अधिकारी की सतर्कता से पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया, जिसके बाद उस पर प्रकरण दर्ज किया गया। रविवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
झूठी पहचान बनाकर मांगी वीआईपी सुविधा
महाकाल थाना पुलिस के अनुसार, सत्कार अधिकारी सुरभित सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अतुल कुमार (40 वर्ष), निवासी महावीर एन्क्लेव, द्वारकापुरी (दिल्ली) ने 6 अप्रैल को फोन कर खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी और मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन में जॉइंट सेक्रेटरी बताया था।उसने 11 अप्रैल को उज्जैन आने और 12 अप्रैल को अपने मित्रों व परिजनों के साथ भस्म आरती में शामिल होने के लिए विशेष व्यवस्था कराने की मांग की थी। साथ ही सर्किट हाउस में दो कमरे आरक्षित करने को भी कहा था।
पहचान पत्र मांगने पर खुला राज
11 अप्रैल को जब आरोपी उज्जैन पहुंचा और सर्किट हाउस में कमरा बुक कराने लगा, तब अधिकारियों ने उससे पहचान पत्र मांगा। इस पर वह टालमटोल करने लगा और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया।संदेह होने पर अधिकारियों ने मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन से संपर्क किया, जहां से स्पष्ट हुआ कि उक्त नाम का कोई अधिकारी वहां पदस्थ नहीं है।
पुलिस कार्रवाई और कोर्ट में पेशी
इसके बाद आरोपी को तुरंत महाकाल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 204 और 319(2) के तहत मामला दर्ज किया।रविवार को आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
प्रशासन की सतर्कता से टली बड़ी गड़बड़ी
इस पूरे मामले में प्रशासनिक सतर्कता की बड़ी भूमिका रही, जिससे एक फर्जी अधिकारी द्वारा वीआईपी सुविधाओं के दुरुपयोग की कोशिश नाकाम हो गई। अधिकारियों ने साफ किया है कि भविष्य में भी इस तरह की किसी भी फर्जीवाड़े की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
