फुलझड़ियों की रोशनी में चमके बुजुर्गों के चेहरे, बुजुर्ग महिलाओं ने नृत्य कर जताया स्नेह; एसपी बोले- बुजुर्गों का आशीर्वाद पाकर मन को मिली विशेष प्रसन्नता

दमोह। दीपावली का पर्व रोशनी, उमंग और खुशियों का प्रतीक है। इस दिन हर व्यक्ति अपने परिवार और प्रियजनों के बीच रहकर उत्सव मनाना चाहता है, लेकिन समाज में ऐसे अनेक बुजुर्ग भी हैं, जिनके जीवन की शाम वृद्धाश्रम की चारदीवारी के बीच गुजर रही है। उनके लिए त्योहारों की खुशियां केवल उपहारों में नहीं, बल्कि किसी के साथ बैठने, हालचाल पूछने, कुछ पल बातचीत करने और अपनेपन का एहसास कराने में छिपी होती हैं। इसी भावना को साकार करते हुए दमोह के पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने दीपावली की पूर्व संध्या पर वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के बीच पर्व मनाया।
यह आयोजन केवल औपचारिक शुभकामनाओं और उपहार वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आत्मीयता, संवेदना और मानवीय रिश्तों की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जो समाज को भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों से मुलाकात की, उनके साथ बैठकर बातचीत की और उनकी खुशियों में सहभागी बने। उन्होंने सभी वृद्धजनों को मिठाई, फल एवं अंगवस्त्र भेंट कर दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक का एक अलग ही स्वरूप देखने को मिला। सामान्यतः पुलिस अधीक्षक की पहचान प्रशासनिक जिम्मेदारियों, कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग से जुड़ी होती है, लेकिन वृद्धाश्रम में वे एक अधिकारी की औपचारिक भूमिका से बाहर निकलकर बुजुर्गों के बीच परिवार के सदस्य की तरह दिखाई दिए। उन्होंने स्वयं बुजुर्गों के साथ फुलझड़ियां जलाकर दीपावली की खुशियां साझा कीं। उनके साथ सीएसपी एच.आर. पांडे एवं सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मनीष कुमार भी इस आत्मीय आयोजन में सहभागी बने।
दीपावली के इस अवसर पर वृद्धाश्रम का वातावरण भी उत्साह और उल्लास से भर गया। बुजुर्ग महिलाओं ने नृत्य कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उनके चेहरों पर दिखाई देने वाली मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि त्योहारों पर किसी अपने का साथ और थोड़ा सा अपनापन कितना बड़ा उपहार बन सकता है। इसी बीच बुजुर्ग महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया। यह क्षण विशेष रूप से भावुक कर देने वाला रहा। एक ओर जिले के पुलिस प्रमुख थे, तो दूसरी ओर उम्र और अनुभव की धरोहर बनीं बुजुर्ग माताएं थीं, जिनके आशीर्वाद में स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का भाव समाहित था।
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने इस अवसर पर चर्चा करते हुए कहा कि बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करके आज उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। दीपावली का महान पर्व वृद्धजनों के बीच मनाना उनके लिए एक अलग अनुभव है। बुजुर्गों के साथ समय बिताकर और उनके चेहरों पर प्रसन्नता देखकर उन्हें विशेष संतोष की अनुभूति हो रही है।
त्योहार की असली रोशनी दूसरों के जीवन में खुशियां पहुंचाने में है
इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष उसका सामाजिक संदेश है। आज जब बदलती जीवनशैली और व्यस्तता के बीच कई बार परिवारों में भी बुजुर्गों को पर्याप्त समय और सम्मान नहीं मिल पाता, ऐसे समय में वृद्धाश्रम पहुंचकर उनके साथ त्योहार मनाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आत्ममंथन का अवसर देता है। बुजुर्ग केवल उम्रदराज व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे अनुभव, संस्कार, संघर्ष और परिवार की विरासत होते हैं। उनके जीवन के अनुभवों से नई पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है।
यह भी समझने की आवश्यकता है कि वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की सबसे बड़ी जरूरत हमेशा भौतिक सुविधाएं नहीं होतीं। कई बार उन्हें केवल किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है, जो उनके पास बैठकर दो बातें कर सके, उनकी खुशियों में शामिल हो सके और उन्हें यह महसूस करा सके कि वे समाज के लिए आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
दमोह पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी की इस पहल ने दीपावली के अवसर पर एक सार्थक संदेश दिया कि वर्दी का दायित्व केवल अपराध नियंत्रण और कानून का पालन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय उत्तरदायित्व भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग स्वयं आगे बढ़कर समाज के उपेक्षित और जरूरतमंद वर्ग के बीच पहुंचते हैं, तो उनका यह व्यवहार दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनता है।
फुलझड़ियों की चमक कुछ ही क्षणों में समाप्त हो जाती है, लेकिन किसी बुजुर्ग के चेहरे पर आई मुस्कान और उसके हाथों से मिला आशीर्वाद लंबे समय तक स्मृतियों में बना रहता है। दीपावली की पूर्व संध्या पर वृद्धाश्रम में मनाया गया यह उत्सव इसी बात का उदाहरण बना कि दीपक घरों में जलते हैं, लेकिन त्योहार तब सार्थक होता है, जब उसकी रोशनी किसी दूसरे के जीवन तक भी पहुंचे।
