यह घटना गोहलपुर थाना क्षेत्र में लेमा गार्डन के पास स्थित गाजी नगर मैदान की है। यहां करीब 350 झुग्गियों की बस्ती बसी हुई है। शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात लगभग दो बजे अचानक कुछ झोपड़ियों से आग की लपटें उठने लगीं। शुरुआती दौर में आग सीमित क्षेत्र में दिखाई दी, लेकिन झुग्गियां एक-दूसरे के नजदीक होने के कारण लपटें तेजी से आसपास के घरों तक पहुंच गईं। कुछ ही समय में आग ने बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, नगर निगम, दमकल विभाग और बिजली कंपनी की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग के फैलाव और संभावित खतरे को देखते हुए एहतियात के तौर पर पूरे प्रभावित क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। दमकल की 13 गाड़ियों और पानी के टैंकरों ने लगातार कई फेरे लगाकर आग बुझाने का प्रयास किया। दमकलकर्मियों को रातभर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका।
इस अग्निकांड में सबसे ज्यादा नुकसान उन परिवारों को हुआ, जिनकी वर्षों की जमा-पूंजी और घरेलू सामान कुछ ही देर में जलकर नष्ट हो गया। आग में अपनी झोपड़ी गंवाने वाली अख्तरी बी ने बताया कि रात में अचानक चीख-पुकार सुनकर उनकी नींद खुली। जब वह बाहर निकलीं तो चारों ओर आग की लपटें दिखाई दे रही थीं। हालात इतने तेजी से बिगड़े कि घर में रखा सामान बचाने का अवसर नहीं मिला।
अख्तरी बी के मुताबिक, उनकी झोपड़ी में रखा अनाज, कपड़े, नकदी, मोबाइल फोन और रोजमर्रा के इस्तेमाल की दूसरी वस्तुएं पूरी तरह जल गईं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 50 वर्षों से इसी स्थान पर रह रही थीं। इतने लंबे समय में परिवार ने मेहनत करके जो कुछ भी जुटाया था, वह एक ही रात में खत्म हो गया। अब उनके सामने रहने और भोजन की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रारंभिक तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व पार्षद ताहिर अली ने बताया कि उन्हें रात करीब 2:30 बजे आग लगने की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने पुलिस और नगर निगम को सूचना दी। उन्होंने भी शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह बताया।
सीएसपी अखिलेश गौर के अनुसार, शुरुआती जानकारी में लगभग 30 से 35 परिवारों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। हालांकि, झुग्गियों की वास्तविक संख्या और नुकसान का पूरा विवरण आग बुझने तथा मलबे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है। स्थानीय पार्षदों और जनप्रतिनिधियों की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है।
धनतेरस जैसे त्योहार के अवसर पर हुए इस अग्निकांड ने गाजी नगर के कई परिवारों को गंभीर संकट में डाल दिया है। फिलहाल सभी प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बावजूद उनके सामने रहने, भोजन और दोबारा जीवन व्यवस्थित करने की बड़ी चुनौती है।
