पिछले वर्ष की तुलना में अब भी 277.7 मिमी कम बारिश, पटेरा में सर्वाधिक 472.4 मिमी और बटियागढ़ में सबसे कम 124 मिमी वर्षा रिकॉर्ड
दमोह, 13 जुलाई /जिले में मानसून का दौर लगातार जारी है और विभिन्न क्षेत्रों में हो रही बारिश से खरीफ फसलों को संजीवनी मिलने लगी है। हालांकि इस वर्ष अब तक हुई वर्षा का आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम बना हुआ है। भू-अभिलेख विभाग द्वारा जारी वर्षा प्रतिवेदन के अनुसार 1 जून से 13 जुलाई 2026 तक जिले में औसतन 289.9 मिलीमीटर (11.4 इंच) वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़ा गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 277.7 मिलीमीटर कम है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जिले में औसतन 567.6 मिलीमीटर (22.3 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई थी।
भू-अभिलेख अधीक्षक ने बताया कि जिले के सभी वर्षामापी केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह औसत वर्षा दर्ज की गई है। वर्षा के वितरण में भी इस बार काफी अंतर देखने को मिल रहा है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कुछ स्थानों पर अभी भी सामान्य से कम वर्षा होने के कारण किसानों की निगाहें आगामी बारिश पर टिकी हुई हैं।
जिले में सबसे अधिक वर्षा पटेरा विकासखंड में 472.4 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जिससे यह क्षेत्र वर्षा के मामले में जिले में सबसे आगे है। इसके बाद हटा में 371.2 मिलीमीटर, पथरिया में 352 मिलीमीटर, दमोह मुख्यालय में 266 मिलीमीटर, जबेरा में 239 मिलीमीटर तथा तेन्दूखेड़ा में 204.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। वहीं बटियागढ़ में सबसे कम 124 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ फसलों की बेहतर वृद्धि के लिए आने वाले दिनों में नियमित और संतुलित वर्षा आवश्यक होगी। वर्तमान में धान, सोयाबीन, उड़द, मूंग और मक्का जैसी फसलों की बुवाई अधिकांश क्षेत्रों में पूरी हो चुकी है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों की स्थिति और अधिक मजबूत होगी।
जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को मानसून की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने तथा जलभराव, बाढ़ जैसी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसानों से मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों पर नजर रखने और कृषि विभाग की सलाह के अनुरूप खेती संबंधी कार्य करने की अपील की गई है।
मानसून के अगले चरण की वर्षा पर अब पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आगामी सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो जिले की औसत वर्षा में तेजी से बढ़ोतरी होने के साथ कृषि गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
