राम राजा सरकार का मंदिर किसी पारंपरिक मंदिर की तरह नहीं बल्कि एक राजमहल जैसा दिखाई देता है। यहां भगवान श्रीराम राजा की तरह सिंहासन पर विराजमान रहते हैं। सुबह की मंगला आरती से लेकर रात्रि के शयन तक सभी धार्मिक अनुष्ठान राजशाही परंपरा के अनुसार संपन्न होते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी भगवान के दर्शन किसी देवालय में नहीं बल्कि अपने राजा के दरबार में उपस्थित होने की भावना से करते हैं।
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा रोजाना होने वाला गार्ड ऑफ ऑनर है। मध्य प्रदेश पुलिस के जवान निर्धारित समय पर मंदिर परिसर में पहुंचकर शस्त्रों के साथ भगवान श्रीराम को सलामी देते हैं। यह सम्मान उसी प्रकार दिया जाता है जैसा किसी राष्ट्राध्यक्ष या राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति को दिया जाता है। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर पहुंचते हैं।
राम राजा सरकार मंदिर की स्थापना के पीछे एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार ओरछा की महारानी कुंवरि गणेश भगवान श्रीराम की परम भक्त थीं। उन्होंने अयोध्या जाकर सरयू नदी के तट पर कठोर तपस्या की और भगवान श्रीराम से ओरछा चलने की प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम बाल स्वरूप में उनके साथ ओरछा आने के लिए तैयार हो गए।
कहा जाता है कि ओरछा आने से पहले भगवान श्रीराम ने महारानी के सामने दो शर्तें रखीं। पहली यह कि ओरछा में वे राजा के रूप में ही विराजमान रहेंगे और दूसरी यह कि जहां पहली बार उन्हें स्थापित किया जाएगा वहां से वे कभी दूसरी जगह नहीं जाएंगे। महारानी ने दोनों शर्तें स्वीकार कर लीं।
ओरछा पहुंचने पर महारानी ने भगवान श्रीराम को सबसे पहले अपने राजमहल के रसोईघर में विराजमान कराया। भगवान श्रीराम वहीं स्थायी रूप से स्थापित हो गए और समय के साथ वही स्थान विश्व प्रसिद्ध राम राजा सरकार मंदिर बन गया। तभी से ओरछा में भगवान श्रीराम को राजा का दर्जा प्राप्त है और आज भी पूरा नगर उन्हें अपना वास्तविक शासक मानता है।
राम राजा सरकार मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी अद्भुत प्रतीक है। यहां निभाई जाने वाली राजशाही परंपराएं और भगवान श्रीराम को दिया जाने वाला राजकीय सम्मान इस मंदिर को देश के अन्य सभी राम मंदिरों से अलग पहचान दिलाता है।
