इस मामले में भाजपा से जुड़े एक नेता का नाम दोषियों में शामिल होने के कारण राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी चर्चा बनी हुई है। दोषियों में अवध बोहरे का नाम शामिल है। वह भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में नगर परिषद रन्नौद से जुड़े बताए गए हैं। हालांकि, अदालत का फैसला मुख्य रूप से हत्या के मामले में हुई सुनवाई, उपलब्ध साक्ष्यों और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा से संबंधित है।
अभियोजन के अनुसार, हत्या की यह घटना 18 मई 2000 को हुई थी। उस दिन सुबह करीब 10 बजकर 15 मिनट पर टुनटुन उर्फ दिनेश रन्नौद बस स्टैंड स्थित राजेंद्र आचार्य की पान की दुकान पर सामान खरीदने पहुंचा था। वह दुकान पर मौजूद था, तभी हथियारों से लैस हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में दिनेश को गंभीर चोटें आईं। चोटों की गंभीरता के कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
हत्याकांड की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कई लोगों के नाम सामने आए। मामले में अलग-अलग आरोपपत्रों और सुनवाई के दौरान आरोपियों की भूमिका की जांच की गई। उपलब्ध अदालती विवरण के मुताबिक, जिन चार लोगों की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है, उनमें देवेंद्र, अवध बोहरे, गिल्टू उर्फ अजय और ऋषि उपाध्याय शामिल हैं। इन सभी की ओर से निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपीलों को स्वीकार नहीं किया और दोषसिद्धि के साथ सजा को भी कायम रखा।
मामले में चार दोषियों के अलावा अन्य लोगों के नाम भी जांच और न्यायिक कार्यवाही के दौरान सामने आए थे। पूरक आरोपपत्र में नरहरि प्रसाद शर्मा, द्वारका प्रसाद, राधा रमन, भरत और संत कुमार के नाम शामिल थे। इनमें नरहरि प्रसाद शर्मा और भरत की अपील लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा शुरुआती मुकदमे में लखन बोहरे, विजय बोहरे, मुकेश सोनी और काली उर्फ कालीचरण को भी आरोपी बनाया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें से कुछ आरोपियों को अदालत से बरी कर दिया गया था, जबकि लखन बोहरे की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब चारों दोषियों को निचली अदालत के निर्देशों के अनुसार शेष सजा भुगतनी होगी। विशेष रूप से जमानत पर बाहर चल रहे दोषियों को तत्काल आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है। करीब ढाई दशक से अधिक समय पुराने इस हत्याकांड में हाईकोर्ट का फैसला न्यायिक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। अदालत ने अपीलों को खारिज कर निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया और चारों दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।
